RBI Monetary Policy Repo Rate 2025: मौद्रिक नीति स्थिर, विकास दर की उम्मीदें बढ़ीं

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की RBI Monetary Policy Repo Rate ने एक बार फिर आर्थिक विश्लेषकों की उम्मीदों के अनुरूप कदम उठाया है। 1 अक्टूबर 2025 को हुई मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की बैठक में RBI ने रेपो रेट (Repo Rate) को 5.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा और अपनी नीति को ‘न्यूट्रल’ बनाए रखा। इस ब्लॉग में हम RBI Monetary Policy Repo Rate विस्तार से समझेंगे कि RBI ने क्या निर्णय लिया, इसका अर्थ क्या है और इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर कैसे पड़ सकता है।

RBI Monetary Policy Repo Rate 2025

1. RBI Monetary Policy Repo Rate और नीति स्थिति में स्थिरता

RBI Monetary Policy Repo Rate के तहत MPC ने रेपो रेट को 5.5% पर बनाए रखने का निर्णय लिया। साथ ही स्टैंडिंग डिपॉजिट फेसीलिटी (SDF) रेट 5.25% और मार्जिनल स्टैंडिंग फेसीलिटी (MSF) व बैंक रेट 5.75% पर स्थिर रखे गए।

RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, “विकास और मुद्रास्फीति की स्थितियां अगस्त 2025 के बाद बदल गई हैं। GST के सरलीकरण से मुद्रास्फीति पर कम दबाव पड़ेगा।”

इस स्थिरता का मतलब यह है कि भारतीय रिज़र्व बैंक फिलहाल ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं कर रहा है, जबकि अर्थव्यवस्था में वृद्धि की संभावनाएं उज्जवल बनी हुई हैं।

2. विकास दर के पूर्वानुमान में सुधार

RBI ने FY26 (वित्तीय वर्ष 2025-26) के लिए GDP विकास दर (Growth Forecast) को 6.8% से बढ़ाकर 6.8% कर दिया है। Q2 FY26 के लिए वृद्धि का अनुमान 7% किया गया है, जबकि Q3 FY26 के लिए 6.4% और Q4 FY26 के लिए 6.2% निर्धारित किया गया है।

मुख्य कारण:

  • सामान्य से ऊपर मानसून और अच्छी खरीफ फसल
  • ग्रामीण मांग में सुधार।
  • सेवाओं के क्षेत्र में मजबूती।
  • रोजगार की स्थिति स्थिर।

हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजार में अमेरिकी टैरिफ (US Tariffs) एक जोखिम बने हुए हैं, जो बाहरी मांग को प्रभावित कर सकते हैं।

RBI का मानना है कि GST सुधार और संरचनात्मक सुधारों का कार्यान्वयन इन जोखिमों को संतुलित करने में मदद करेगा।

3. मुद्रास्फीति (Inflation) में कमी

RBI ने FY26 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 3.1% से घटाकर 2.6% कर दिया है।
तीन मुख्य कारण:

  1. खाद्य पदार्थों की कीमतों में गिरावट
  2. GST दरों में सुधार और सरलता
  3. मानसून के दौरान पर्याप्त जलाशय और खाद्य भंडार।

क्यू2 FY26 के लिए मुद्रास्फीति 1.8%, क्यू3 FY26 के लिए 1.8% और क्यू4 FY26 के लिए 4% अनुमानित है। Q1 FY27 के लिए CPI अनुमान 4.5% किया गया है।

गवर्नर ने कहा, “स्वास्थ्यपूर्ण मानसून, खरीफ फसल और पर्याप्त भंडार की वजह से खाद्य कीमतें स्थिर रहेंगी।”

4. भारतीय रुपये का अंतर्राष्ट्रीयकरण

RBI ने विदेशी व्यापार को सरल बनाने और रुपये के अंतर्राष्ट्रीयकरण के लिए कई प्रस्ताव रखे हैं:

  • भूटान, नेपाल और श्रीलंका जैसे देशों के लिए भारतीय रुपये में क्रॉस-बॉर्डर लेंडिंग की अनुमति।
  • प्रमुख व्यापारिक देशों की मुद्राओं के लिए साफ-सुथरे रेफरेंस रेट्स स्थापित करना।
  • SRVA बैलेंस का उपयोग बढ़ाना, ताकि इन्हें कॉर्पोरेट बॉन्ड और कमर्शियल पेपर्स में निवेश के लिए इस्तेमाल किया जा सके।

इन कदमों से रुपये का वैश्विक स्तर पर उपयोग बढ़ सकता है और भारत की अंतरराष्ट्रीय वित्तीय स्थिति मजबूत हो सकती है।

5. बैंकिंग सेक्टर के लिए अतिरिक्त उपाय

RBI ने 22 अतिरिक्त उपायों की घोषणा की है, जिनका उद्देश्य बैंकिंग क्षेत्र को मजबूत बनाना, क्रेडिट का प्रवाह बढ़ाना और उपभोक्ता संतुष्टि बढ़ाना है।

कुछ प्रमुख उपाय:

  1. जोखिम आधारित डिपॉजिट बीमा प्रीमियम की शुरुआत।
  2. लेंडिंग सीमा में वृद्धि: सूचीबद्ध ऋण प्रतिभूतियों पर ऋण की सीमा बढ़ाना और IPO वित्तपोषण सीमा में सुधार।
  3. इन्फ्रास्ट्रक्चर फाइनेंसिंग की लागत में कमी: NBFCs के लिए जोखिम भार कम करना।
  4. ब्याज दर में लचीलापन: बैंकों के लिए ग्राहकों के लेन-देन खातों को खोलने और संचालित करने में सुविधा।
  5. FEMA नियमों में सरलीकरण: गैर-निवासी व्यवसायिक उपस्थिति को आसान बनाना।

इन सुधारों से बैंकिंग प्रणाली में स्थिरता आएगी, वित्तीय बाजार अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे और क्रेडिट का प्रवाह बेहतर होगा।

RBI Monetary Policy Repo Rate का अर्थ

RBI Monetary Policy Repo Rate वह दर है जिस पर बैंक रिज़र्व बैंक से अल्पकालीन ऋण लेते हैं। इसे स्थिर रखने से अर्थव्यवस्था में निम्न प्रभाव पड़ सकते हैं:

  • ऋण की लागत स्थिर रहती है, जिससे होम लोन और व्यवसायिक ऋण की ब्याज दरें प्रभावित होती हैं।
  • उपभोक्ता और उद्योग निवेश में स्थिरता आती है।
  • मुद्रास्फीति नियंत्रण में बनी रहती है और आर्थिक वृद्धि संतुलित रहती है।

इस बार MPC ने नीति को न्यूट्रल रखा है, यानी RBI अर्थव्यवस्था की स्थिति पर निगरानी रख रहा है, लेकिन ब्याज दरों में जल्द बदलाव की संभावना नहीं

निष्कर्ष

RBI की हाल की मौद्रिक नीति ने स्पष्ट किया है कि भारत की अर्थव्यवस्था सकारात्मक विकास की राह पर है। रेपो रेट स्थिर रहने और मुद्रास्फीति में कमी के साथ-साथ विकास दर के संशोधन ने निवेशकों और आम जनता के लिए भरोसे का माहौल बनाया है।

RBI द्वारा घोषित अतिरिक्त उपायों से बैंकिंग प्रणाली अधिक प्रतिस्पर्धी और लचीली होगी। साथ ही, रुपये का अंतर्राष्ट्रीयकरण भारत को वैश्विक वित्तीय मंच पर मजबूत करेगा।

इसलिए, RBI Monetary Policy Repo Rate के इस निर्णय का प्रभाव न केवल मौजूदा वित्तीय वर्ष में बल्कि आने वाले वर्षों में भी भारतीय अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण रहेगा।

Disclaimer:

यह ब्लॉग केवल सूचना और शैक्षिक उद्देश्य के लिए बनाया गया है। इसमें दी गई जानकारी RBI की आधिकारिक घोषणाओं, समाचार रिपोर्ट और वित्तीय विश्लेषण पर आधारित है।

हम इस ब्लॉग में दी गई किसी भी जानकारी की सटीकता, पूर्णता या समयबद्धता की गारंटी नहीं देते हैं। निवेश, वित्तीय या आर्थिक निर्णय लेने से पहले हमेशा पेशेवर वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।

इस ब्लॉग के उपयोग से होने वाले किसी भी नुकसान या हानि के लिए लेखक या वेबसाइट जिम्मेदार नहीं होंगे।

FAQs

Q1: RBI Repo Rate क्या है?
A1: Repo Rate वह दर है जिस पर बैंक RBI से अल्पकालीन ऋण लेते हैं। यह मौद्रिक नीति का मुख्य उपकरण है।

Q2: Repo Rate स्थिर रखने का अर्थ क्या है?
A2: इसका मतलब है कि बैंक के लिए उधार की लागत स्थिर रहेगी और अर्थव्यवस्था में अचानक बदलाव नहीं होगा।

Q3: RBI का नीति रुख ‘न्यूट्रल’ क्यों है?
A3: ‘न्यूट्रल’ का मतलब है कि RBI फिलहाल दरों में कोई बढ़ोतरी या कमी नहीं करेगा, लेकिन अर्थव्यवस्था पर नजर बनाए रखेगा।

Q4: मुद्रास्फीति घटने का क्या अर्थ है?
A4: इसका मतलब है कि कीमतों में तेजी से वृद्धि नहीं होगी, जिससे आम लोगों के लिए जीवन यापन सस्ता रहेगा।

Q5: RBI के अतिरिक्त उपाय किस लिए हैं?
A5: बैंकिंग सेक्टर को मजबूत बनाने, क्रेडिट का प्रवाह बढ़ाने और विदेशी निवेशकों को आकर्षित करने के लिए।

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