नेपाल में Sushila Karki बनीं पहली महिला प्रधानमंत्री, पीएम मोदी ने दी बधाई

नेपाल की राजनीति में इस समय बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी प्रदर्शनों और Gen Z आंदोलन के दबाव के बीच KP शर्मा ओली सरकार को इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद देश के लिए सबसे बड़े ऐतिहासिक फैसले में नेपाल की पूर्व मुख्य न्यायाधीश Sushila Karki प्रधानमंत्री बनी हैं।

भारत ने इस बदलाव का स्वागत करते हुए इसे शांति और स्थिरता की दिशा में अहम कदम बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी Sushila Karki को अंतरिम प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी और भरोसा जताया कि भारत-नेपाल के रिश्ते और मजबूत होंगे।


पीएम मोदी की बधाई और भारत का रुख

शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर पोस्ट कर Sushila Karki को अंतरिम प्रधानमंत्री पद संभालने की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने लिखा –

“मैं नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री Sushila Karki को शुभकामनाएँ देता हूँ। भारत, नेपाल की शांति, प्रगति और समृद्धि के लिए हमेशा दृढ़ता से प्रतिबद्ध रहेगा।”

भारत ने विदेश मंत्रालय (MEA) के ज़रिए भी बयान जारी कर कहा कि पड़ोसी, लोकतांत्रिक साझेदार और लंबे समय से विकास सहयोगी होने के नाते भारत नेपाल के साथ मिलकर काम करता रहेगा।


कौन हैं Sushila Karki?

Sushila Karki (73 वर्ष) का नाम इतिहास में दर्ज हो गया है। वह नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी हैं। इससे पहले भी उन्होंने इतिहास रचा था जब वह देश की पहली महिला मुख्य न्यायाधीश बनी थीं।

Sushila Karki ने शुक्रवार शाम नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल के सामने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। राष्ट्रपति पौडेल ने इस फैसले से पहले दिनभर Gen Z नेताओं, संवैधानिक विशेषज्ञों और सेना प्रमुख से लंबी चर्चा की।

Sushila Karki की लोकप्रियता का कारण केवल उनका न्यायिक करियर ही नहीं है, बल्कि उनकी साफ-सुथरी छवि और भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता का भरोसा भी है।


नेपाल Gen Z आंदोलन और राजनीतिक संकट

नेपाल की मौजूदा राजनीति को समझने के लिए Gen Z आंदोलन को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। पिछले कई महीनों से युवा पीढ़ी भ्रष्टाचार और सरकारी नीतियों के खिलाफ सड़कों पर उतरी हुई थी।

ओली सरकार ने जब सोशल मीडिया पर बैन लगाया, तो हालात और बिगड़ गए। विरोध-प्रदर्शन हिंसक हो गए। संसद भवन समेत कई सरकारी दफ़्तरों और नेताओं के घरों को आग के हवाले कर दिया गया।

सेना को हस्तक्षेप करना पड़ा और पूर्व प्रधानमंत्री ओली को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसी माहौल में Sushila Karkiजनता और खासतौर पर Gen Z प्रदर्शनकारियों की पसंदीदा नेता बनकर सामने आईं।


Discord वोटिंग और Gen Z का समर्थन

दिलचस्प बात यह है कि कार्की को Gen Z नेताओं ने ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म Discord पर पब्लिक वोटिंग के ज़रिए अंतरिम प्रधानमंत्री के रूप में चुना।

यह पहली बार है जब नेपाल की राजनीति में जनता और युवा पीढ़ी ने सीधे तौर पर ऑनलाइन माध्यम से किसी नेता का चयन किया। इससे यह भी साफ हो गया कि नई पीढ़ी पारदर्शिता और लोकतांत्रिक भागीदारी को कितना महत्व देती है।


भारत-नेपाल संबंधों पर असर

भारत और नेपाल के रिश्ते हमेशा से खास रहे हैं। दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, धार्मिक और सामाजिक जुड़ाव बहुत गहरा है।

भारत ने हमेशा नेपाल के राजनीतिक बदलावों में स्थिरता और विकास का समर्थन किया है। इस बार भी भारत ने साफ कहा है कि वह नेपाल के साथ मिलकर क्षेत्र में शांति और स्थिरता कायम करने के लिए काम करता रहेगा।

भारत के इस रुख को नेपाल की जनता और नई सरकार दोनों ने सकारात्मक तौर पर लिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में भारतनेपाल संबंध और मज़बूत होंगे।


Sushila Karki के सामने चुनौतियाँ

हालाँकि Sushila Karki प्रधानमंत्री बनने के बाद जनता की उम्मीदों का केंद्र बन गई हैं, लेकिन उनके सामने कई बड़ी चुनौतियाँ हैं:

  1. शांति और व्यवस्था बहाल करना – हिंसक प्रदर्शनों के बाद देश में क़ानून-व्यवस्था की स्थिति नाज़ुक है।
  2. भ्रष्टाचार पर काबू – जनता चाहती है कि नया नेतृत्व भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाए।
  3. जनता का विश्वास बनाए रखनाGen Z आंदोलन ने साबित किया है कि युवा पीढ़ी सरकार की हर गतिविधि पर नज़र रखेगी।
  4. चुनाव की तैयारी – 5 मार्च 2026 को होने वाले आम चुनाव तक कार्की को एक स्थिर प्रशासन देना होगा।
  5. भारतनेपाल रिश्तों को और गहरा करना – यह उनके लिए सबसे बड़ा अवसर भी है और चुनौती भी।

नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक महत्व

Sushila Karki का प्रधानमंत्री बनना केवल राजनीतिक बदलाव नहीं है, बल्कि नेपाल के इतिहास में महिला सशक्तिकरण की सबसे बड़ी उपलब्धि भी है।

यह इस बात का संकेत है कि नेपाल की जनता, खासकर युवा पीढ़ी, अब बदलाव चाहती है। Sushila Karkiभ्रष्टाचार-मुक्त शासन और नई सोच की प्रतीक बनकर उभरी हैं।


नेपाल की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़

नेपाल इस समय एक ऐसे राजनीतिक दौर से गुज़र रहा है, जिसने पूरे दक्षिण एशिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। Gen Z आंदोलन के दबाव और जनता की नाराज़गी ने पुरानी राजनीतिक व्यवस्था को हिला दिया। KP शर्मा ओली की सरकार, जो लंबे समय से विवादों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी हुई थी, अंततः ढह गई।

इस उथल-पुथल के बीच, जनता की उम्मीदों और नई पीढ़ी के सपनों का प्रतीक बनकर सामने आईं – Sushila Karki, जिन्हें अब नेपाल की अंतरिम प्रधानमंत्री चुना गया है।

73 वर्षीय Sushila Karki का प्रधानमंत्री बनना केवल एक राजनीतिक नियुक्ति नहीं है, बल्कि यह नेपाल की लोकतांत्रिक यात्रा का ऐतिहासिक क्षण भी है। यह पहली बार है जब नेपाल की सत्ता की कमान एक महिला के हाथों में आई है। उनकी साफ-सुथरी छवि और न्यायपालिका में लंबे अनुभव ने उन्हें जनता का विश्वास दिलाया।


क्यों खास है Sushila Karki का चयन?

नेपाल में लंबे समय से नेतृत्व की बागडोर पुरुष नेताओं के हाथों में रही है। ऐसे में कार्की का प्रधानमंत्री पद संभालना महिला सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

इसके अलावा, उनका चयन परंपरागत राजनीतिक दलों द्वारा नहीं बल्कि Gen Z आंदोलन और ऑनलाइन वोटिंग के ज़रिए हुआ। यह इस बात का संकेत है कि नेपाल की नई पीढ़ी अब राजनीति को पारंपरिक ढर्रे पर नहीं चलने देगी।

जनता चाहती है –

  • भ्रष्टाचार मुक्त शासन
  • पारदर्शी प्रशासन
  • जनभागीदारी पर आधारित राजनीति

Sushila Karki इन उम्मीदों की नई उम्मीद बन गई हैं। यही वजह है कि आज उन्हें न केवल नेपाल में बल्कि पूरे क्षेत्र में “परिवर्तन की प्रतीक” के तौर पर देखा जा रहा है।


निष्कर्ष

नेपाल में Gen Z आंदोलन ने जिस तरह से सरकार को गिराया और नई अंतरिम सरकार को जन्म दिया, वह लोकतंत्र की नई कहानी है।

Sushila Karki प्रधानमंत्री बनकर न केवल नेपाल की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी हैं, बल्कि उन्होंने यह भी साबित किया है कि जनता और खासकर युवा वर्ग यदि संगठित हो जाए, तो सत्ता के समीकरण बदल सकते हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की बधाई और भारत का सकारात्मक रुख यह दर्शाता है कि आने वाले समय में भारतनेपाल संबंध और मज़बूत होंगे।

अब सबकी नज़रें 2026 के आम चुनावों पर हैं, जब नेपाल को एक नई स्थायी सरकार मिलेगी। लेकिन फिलहाल, सुशीला कार्की जनता की उम्मीदों और विश्वास की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी हैं।

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