प्रस्तावना
भारत का दक्षिणी राज्य केरल इन दिनों एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहा है। यहां तेजी से फैल रहा संक्रमण Kerla brain eating amoeba (ब्रेन ईटिंग अमीबा) लोगों की जान के लिए खतरा बन चुका है। इस बीमारी के पीछे ज़िम्मेदार है नेग्लेरिया फाउलेरी नामक सूक्ष्म जीव, जिसे आम बोलचाल में “ब्रेन ईटिंग अमीबा” कहा जाता है। पिछले कुछ महीनों में इसके कई मामले दर्ज किए गए हैं और दुर्भाग्यवश कई लोगों की मौत भी हो चुकी है। यही वजह है कि राज्य का स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है और आम जनता के बीच भय का माहौल बना हुआ है।
Kerla Brain Eating Amoeba की मौजूदा स्थिति
केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज के मुताबिक, वर्ष 2025 में अब तक इस संक्रमण के 67 से अधिक मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें से 18 लोगों की मौत हो चुकी है। खास तौर पर तिरुवनंतपुरम, कोझिकोड और मलप्पुरम जैसे जिलों से सबसे ज्यादा मामले रिपोर्ट हुए हैं।
पहले यह संक्रमण कुछ खास जगहों तक सीमित था, लेकिन हाल के मामलों में यह अलग-अलग इलाकों से सामने आ रहा है। इसका मतलब है कि यह किसी एक पानी के स्रोत से नहीं, बल्कि कई संभावित कारणों से फैल रहा है। यही वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसे और भी जटिल चुनौती मान रहे हैं।
Kerla Brain Eating Amoeba संक्रमण कैसे फैलता है?

यह जानना जरूरी है कि Kerla brain eating amoeba का संक्रमण इंसान से इंसान में नहीं फैलता। यह केवल दूषित पानी के संपर्क में आने से होता है। जब कोई व्यक्ति तालाब, झील या बिना क्लोरीन वाले स्विमिंग पूल में नहाता है और पानी नाक में चला जाता है, तभी यह अमीबा शरीर के अंदर प्रवेश करता है। नाक से होते हुए यह सीधा दिमाग तक पहुंचकर गंभीर नुकसान पहुंचाता है।

Kerla Brain Eating Amoeba लक्षण क्या हैं?
ब्रेन ईटिंग अमीबा संक्रमण के लक्षण बहुत तेज़ी से विकसित होते हैं। शुरुआती लक्षण अक्सर सामान्य बुखार या सिरदर्द जैसे लगते हैं, लेकिन जल्द ही स्थिति बिगड़ जाती है। मुख्य लक्षण हैं:
- तेज़ सिरदर्द
- बुखार
- उल्टी और मतली
- गर्दन में अकड़न
- दौरे (Seizures)
- भ्रम और बेहोशी
संक्रमण होने के बाद लक्षण बहुत तेजी से बढ़ते हैं और अगर तुरंत इलाज न हो तो मरीज की जान जा सकती है।
Kerla Brain Eating Amoeba मृत्यु दर और इलाज
वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार, इस संक्रमण में वैश्विक स्तर पर सर्वाइवल रेट केवल 3% है। लेकिन केरल में समय रहते पहचान और दवा Miltefosine के इस्तेमाल से यह दर लगभग 24% तक बढ़ाई गई है, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
सरकार और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां
- केरल स्वास्थ्य विभाग ने हालात को देखते हुए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं:
- सभी अस्पतालों को निर्देश दिया गया है कि हर मेनिन्जाइटिस केस की गहन जांच की जाए।
- दूषित पानी के स्रोतों की पहचान करने के लिए पर्यावरणीय सैंपलिंग (Environmental Sampling) शुरू की गई है।
- राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र (NCDC) की मदद से संभावित संक्रमण स्रोतों पर रिसर्च की जा रही है।
- स्विमिंग पूल और थीम पार्क में नियमित क्लोरीनेशन अनिवार्य कर दिया गया है।
- गांवों और शहरों में सामुदायिक कुओं और टैंकों की सफाई पर जोर दिया जा रहा है।
Kerla Brain Eating Amoeba बचाव के उपाय
चूंकि यह संक्रमण जानलेवा है, इसलिए रोकथाम ही सबसे बड़ा हथियार है। स्वास्थ्य विभाग और विशेषज्ञों ने लोगों को इन सावधानियों का पालन करने की सलाह दी है:
- तालाब, झील और बिना क्लोरीन वाले स्विमिंग पूल में नहाने से बचें।
- अगर मीठे पानी में जाना ही पड़े तो नाक क्लिप का इस्तेमाल करें।
- घरों और सार्वजनिक स्थानों के पानी के टैंकों की नियमित सफाई और क्लोरीनेशन करें।
- कुओं को वैज्ञानिक तरीके से क्लोरीनयुक्त करें।
- चेहरे और नाक को दूषित या गंदे पानी से धोने से बचें।
- जैसे ही किसी तरह के लक्षण नज़र आएं, बिना समय गँवाए डॉक्टर से मिलें।
हाल की घटनाएँ
हाल ही में तिरुवनंतपुरम जिले में 17 वर्षीय किशोर को यह संक्रमण हुआ, जिसके बाद प्रशासन ने Akkulam Tourist Village Swimming Pool को बंद कर दिया और वहां से पानी के सैंपल जांच के लिए लिए गए।
इसी तरह, मलप्पुरम जिले की 56 वर्षीय महिला और वायनाड के 45 वर्षीय व्यक्ति की मौत ने स्थिति को और गंभीर बना दिया।
Kerla brain eating amoeba से जुड़े आम सवाल
ब्रेन ईटिंग अमीबा क्या होता है?
ये एक तरह का कीटाणु है जो ज़्यादातर गंदे या बिना साफ किए हुए मीठे पानी में पाया जाता है । अगर ये पानी नाक में चला जाए तो अमीबा दिमाग तक पहुँचकर संक्रमण कर देता है ।
क्या यह बीमारी छूने या पास रहने से फैलती है?
नहीं । यह केवल दूषित पानी से फैलती है । किसी बीमार व्यक्ति के साथ रहने या बात करने से इसका खतरा नहीं होता ।
लक्षण कितनी जल्दी दिखने लगते हैं?
संक्रमण के बाद कुछ ही दिनों में तेज़ सिरदर्द, बुखार, उल्टी, गर्दन अकड़ना और कभी- कभी दौरे भी शुरू हो सकते हैं ।
इसका इलाज है क्या?
हाँ, लेकिन मुश्किल है । अगर बीमारी समय रहते पकड़ में आ जाए तो दवाओं से इलाज संभव है । देर होने पर मरीज की जान भी जा सकती है ।
इससे बचने का आसान तरीका क्या है?
तालाब या झील जैसे गंदे पानी में नहाने से बचें । अगर जाना ही पड़े तो नाक में पानी न जाने दें । घर की टंकी और कुएँ को साफ और क्लोरीनयुक्त रखें । साफ- सफाई का हमेशा ध्यान रखें ।
नल का पानी इस्तेमाल करना ठीक है?
अगर नल का पानी फिल्टर या क्लोरीन से साफ किया गया है तो बिल्कुल ठीक है । लेकिन अगर पानी साफ न दिखे तो उससे चेहरा धोने या स्नान करने से बचें ।
केरल में हालात कितने गंभीर हैं?
केरल में हालात कितने गंभीर हैं? केरल में अब तक 60 से ज़्यादा लोग इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं और कई लोगों की मौत भी हो चुकी है । इसी वजह से सरकार ने लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी है ।
निष्कर्ष
Kerla brain eating amoeba संक्रमण निस्संदेह एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है। हालांकि यह संक्रमण दुर्लभ है, लेकिन इसकी घातकता और तेजी से फैलाव इसे बेहद खतरनाक बनाते हैं। लोगों को सतर्क रहना चाहिए, पानी की स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना चाहिए और किसी भी लक्षण पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
अगर समय रहते सही कदम उठाए जाएं, तो इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है और अनावश्यक मौतों को रोका जा सकता है।
पूरी जानकारी पाने के लिए यहाँ क्लिक करें और अधिक जानकारी और टेक्नोलॉजी से जुड़ी ख़बरों के लिए हमारा ब्लॉग को fallow करे।
