Zubeen Garg Dies: सिंगापुर हादसे में असम का सुरों का सम्राट अब नहीं रहा

भारत के संगीत जगत से एक दिल दहलाने वाली खबर सामने आई है। असम के जाने-माने गायक और अभिनेता ज़ुबीन गर्ग (Zubeen Garg) का सिंगापुर में निधन हो गया। 52 वर्षीय इस गायक का जीवन संगीत के नाम समर्पित था, लेकिन अचानक हुए हादसे ने उनके लाखों चाहने वालों को स्तब्ध कर दिया है। सोशल मीडिया पर सिर्फ़ एक ही खबर छाई हुई है – “Zubeen Garg Dies”

हादसे की पूरी कहानी

ज़ुबीन गर्ग 20 और 21 सितम्बर को सिंगापुर में होने वाले North East India Festival में परफॉर्म करने गए थे। यह फेस्टिवल नॉर्थ ईस्ट इंडिया की संस्कृति और कला को दुनिया के सामने पेश करने का एक मंच था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 19 सितम्बर की दोपहर को ज़ुबीन गर्ग अपने कुछ परिचितों के साथ स्कूबा डाइविंग करने गए। डाइविंग के दौरान अचानक उन्हें सांस लेने में परेशानी हुई। उन्हें तुरंत पानी से बाहर निकाला गया और CPR दिया गया। इसके बाद उन्हें Singapore General Hospital ले जाया गया।

डॉक्टरों ने काफी कोशिश की लेकिन शाम लगभग 5:14 बजे (सिंगापुर समय) उन्हें मृत घोषित कर दिया। भारतीय समयानुसार यह दोपहर लगभग 2:30 बजे की घटना थी।

अतिम यात्रा की तैयारी

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वे लगातार भारतीय उच्चायोग से संपर्क में हैं। ज़ुबीन का पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाया जाएगा ताकि उनके प्रशंसक और परिवार अंतिम विदाई दे सकें।

सीएम सरमा ने X (Twitter) पर लिखा:
“मैं भारतीय उच्चायुक्त से लगातार संपर्क में हूँ। प्रिय ज़ुबीन का पार्थिव शरीर जल्द असम लाया जाएगा। यह असम और पूरे भारत के लिए अपूरणीय क्षति है।”

ज़ुबीन गर्ग का संगीतमय सफर

ज़ुबीन गर्ग का नाम सुनते ही लोगों के दिल में संगीत की मधुर लहर दौड़ जाती है। वे न केवल असम बल्कि पूरे देश की पहचान बन चुके थे।

  • उन्होंने असमिया, हिंदी, बंगाली, नेपाली और कई अन्य भाषाओं में गाने गाए।
  • बॉलीवुड फिल्म गैंगस्टर का गाना “या अली” उनकी सबसे बड़ी पहचान बना। यह गाना आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में शामिल है।
  • कृष 3 का मशहूर गाना “दिल तू ही बता” और प्यार के साइड इफेक्ट्स का “जाने क्या चाहे मन” भी उनकी मधुर आवाज़ की मिसाल हैं।
  • उन्होंने कांचनजंगा, मिशन चाइना, मोन जाय जैसी असमिया फिल्मों में अभिनय और निर्देशन भी किया।

उनका संगीत हमेशा भावनाओं से भरा हुआ होता था। शायद यही कारण है कि वे सिर्फ़ एक गायक नहीं बल्कि एक भावनात्मक अनुभव बन गए थे।

व्यक्तिगत संघर्ष और प्रेरणा

ज़ुबीन गर्ग का जीवन आसान नहीं रहा। साल 2002 में उनकी बहन जोंकी की सड़क हादसे में मृत्यु हो गई थी। यह घटना उनके जीवन का सबसे बड़ा झटका थी। लेकिन उन्होंने इस दर्द को अपनी ताकत में बदलकर संगीत को और गहराई दी।

साल 2022 में भी वे चोटिल हो गए थे जब डिब्रूगढ़ के एक रिसॉर्ट में गिरकर बेहोश हो गए थे। उन्हें एयर एम्बुलेंस से गुवाहाटी लाया गया था। उस समय वे ठीक हो गए थे, लेकिन इस बार हादसा घातक साबित हुआ।

ज़ुबीन गर्ग की आख़िरी पोस्ट

मौत से कुछ दिन पहले 16 सितम्बर को ज़ुबीन ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो डाला था जिसमें उन्होंने कहा था:
“सिंगापुर के दोस्तों, मैं 20 और 21 सितम्बर को नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल में परफॉर्म करने आ रहा हूँ। आप सभी से मिलने का इंतजार रहेगा।”

किसी को अंदाज़ा भी नहीं था कि यही उनकी आख़िरी पब्लिक मैसेज होगी। आज वही वीडियो सोशल मीडिया पर लाखों बार शेयर हो रहा है।

शोक संदेश और श्रद्धांजलि

जैसे ही खबर आई कि Zubeen Garg Dies, पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई।

  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा: “ज़ुबीन गर्ग का निधन संगीत जगत के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी गायकी को पीढ़ियाँ याद रखेंगी।”
  • राहुल गांधी ने कहा: “यह भारतीय संगीत के लिए एक बड़ी त्रासदी है। ज़ुबीन की आवाज़ ने एक पूरी पीढ़ी को परिभाषित किया।”
  • प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी शोक व्यक्त करते हुए कहा कि “उनकी धुनें हमेशा दिलों में गूंजती रहेंगी।”
  • केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने लिखा: “हमने एक जादुई आवाज़ और बहुमुखी व्यक्तित्व खो दिया है।”

अभिनेता आदिल हुसैन ने लिखा:
“प्रिय ज़ुबीन, तुम्हारी आवाज़ हमें हमेशा याद दिलाती रहेगी कि संगीत आत्मा की भाषा है। अलविदा मेरे दोस्त।”

असम का गौरव

असम के लोग ज़ुबीन गर्ग को सिर्फ़ एक गायक नहीं, बल्कि अपना सांस्कृतिक नायक मानते थे। उनकी आवाज़ हर त्योहार और हर समारोह में गूंजती थी। वे अक्सर असम की आत्मा की आवाज़ कहे जाते थे।

उनकी लोकप्रियता सिर्फ़ असम तक सीमित नहीं थी, बल्कि वे पूरे भारत और यहां तक कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचाने जाते थे। उनके गाने उत्तर-पूर्व भारत की सांस्कृतिक विविधता को दुनिया तक पहुँचाते थे।

Zubeen Garg Dies: न भरने वाली कमी

यह कहना कि “Zubeen Garg Dies” केवल एक व्यक्ति की मौत है, सही नहीं होगा। यह असम, भारत और पूरे संगीत जगत के लिए एक अमिट क्षति है। उनकी आवाज़ ने करोड़ों दिलों को छुआ और आने वाली पीढ़ियाँ भी उनसे प्रेरणा लेती रहेंगी।

ज़ुबीन गर्ग की कमी हमेशा खलेगी। लेकिन उनके गाने और उनकी यादें उन्हें हमेशा जीवित रखेंगी।

निष्कर्ष

ज़ुबीन गर्ग का जीवन हमें यह सिखाता है कि कला की कोई सीमा नहीं होती। वे असम से निकले लेकिन भारत और दुनिया भर में अपने संगीत का परचम लहराया। आज जब हम कहते हैं “Zubeen Garg Dies”, तो यह सिर्फ़ उनके जीवन का अंत है, उनकी आवाज़ और उनका संगीत अमर रहेंगे।

उनकी गायकी आने वाले दशकों तक लोगों के दिलों को छूती रहेगी और उन्हें हमेशा याद किया जाएगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ) – Zubeen Garg Dies

1. Zubeen Garg कौन थे?

ज़ुबीन गर्ग असम के मशहूर गायक, संगीतकार, अभिनेता और निर्देशक थे। उन्होंने असमिया, हिंदी, बंगाली और नेपाली जैसी कई भाषाओं में गाने गाए। बॉलीवुड फिल्म गैंगस्टर का गाना “या अली” उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला गाना बना।

2. Zubeen Garg का निधन कब और कहाँ हुआ?

ज़ुबीन गर्ग का निधन 19 सितम्बर 2025 को सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग के दौरान हुआ हादसे में हुआ। उन्हें अस्पताल ले जाया गया लेकिन बचाया नहीं जा सका।

3. Zubeen Garg की मौत का कारण क्या है?

रिपोर्ट्स के अनुसार, स्कूबा डाइविंग करते समय उन्हें सांस लेने में परेशानी (Respiratory Problem) हुई। उन्हें तुरंत CPR देकर अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टर उन्हें बचा नहीं पाए।

4. Zubeen Garg का सबसे मशहूर गाना कौन सा है?

उनका सबसे मशहूर गाना बॉलीवुड फिल्म गैंगस्टर का “या अली” है। इसके अलावा “दिल तू ही बता” (कृष 3) और कई असमिया गाने भी बेहद लोकप्रिय हुए।

5. Zubeen Garg का शव भारत कब लाया जाएगा?

असम सरकार और भारतीय उच्चायोग ने जानकारी दी है कि उनका पार्थिव शरीर जल्द से जल्द भारत लाया जाएगा ताकि प्रशंसक और परिवार अंतिम श्रद्धांजलि दे सकें।

6. Zubeen Garg Dies खबर पर नेताओं और सितारों ने क्या कहा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी, हिमंत बिस्वा सरमा और कई बॉलीवुड कलाकारों ने गहरा दुख जताया। सभी ने कहा कि यह संगीत जगत की अपूरणीय क्षति है।

7. Zubeen Garg को क्यों असम का गौरव कहा जाता था?

क्योंकि उन्होंने न केवल असम बल्कि पूरे नॉर्थ ईस्ट की संस्कृति और संगीत को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया। लोग उन्हें असम की आत्मा की आवाज़ कहते थे।

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