IT Stocks में बड़ी गिरावट: Trump के H-1B वीज़ा फीस बढ़ाने के बाद निवेशकों के लिए क्या है विकल्प?

हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने H-1B वीज़ा शुल्क में ऐतिहासिक बढ़ोतरी की घोषणा की, जिससे भारतीय IT stocks पर भारी प्रभाव पड़ा। यह निर्णय भारतीय आईटी कंपनियों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है, क्योंकि ये कंपनियां वर्षों से अमेरिकी बाजार में अपने कर्मचारियों को भेजने के लिए H-1B वीज़ा पर निर्भर रही हैं। इस ब्लॉग में हम विस्तार से समझेंगे कि इस फैसले का भारतीय IT sector पर क्या असर होगा, कौन सी कंपनियां इससे प्रभावित होंगी, और निवेशकों को अब क्या कदम उठाने चाहिए।

H-1B वीज़ा शुल्क में बढ़ोतरी और इसका असर

22 सितंबर 2025 को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने एक घोषणा की, जिसके अनुसार H-1B वीज़ा शुल्क को $1,000 से बढ़ाकर $100,000 कर दिया गया। यह वृद्धि केवल नई वीज़ा एप्लीकेशन्स पर लागू होगी और मौजूदा वीज़ा धारकों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

इस फैसले का सीधा असर भारतीय IT कंपनियों पर पड़ा, जिनमें TCS, Infosys, Wipro, HCL Technologies, Tech Mahindra, Coforge और Mphasis जैसी कंपनियां शामिल हैं।

  • Nifty IT index में 3.5% से अधिक की गिरावट आई।
  • Tech Mahindra सबसे ज्यादा प्रभावित हुई, जिसका शेयर मूल्य 5.8% गिरा।
  • Mphasis और Persistent Systems के शेयर लगभग 5% तक नीचे आए।
  • TCS, Wipro, HCL Tech और Infosys के शेयर 3–5% तक घटे।

विश्लेषकों के अनुसार, कंपनियां अब ऑफशोर डिलीवरी मॉडल पर ज्यादा भरोसा करेंगी ताकि लागत को कम किया जा सके और मुनाफा बनाए रखा जा सके।

भारतीय IT कंपनियों पर H-1B वीज़ा बढ़ोतरी का असर

Indian IT stocks like TCS, Infosys, Wipro falling after H-1B visa fee hike

हालांकि यह बदलाव कई निवेशकों के लिए चिंता का विषय है, MOSL (Motilal Oswal Securities Ltd.) ने कहा कि भारतीय IT कंपनियों का H-1B वीज़ा पर निर्भरता पहले से कम हो गई है।

  • पिछले दस वर्षों में कंपनियों ने स्थानीय अमेरिकी कर्मचारियों को अधिक हायर किया है।
  • अब लगभग 20% कर्मचारी ऑन-साइट हैं, जिनमें से केवल 20–30% H-1B वीज़ा धारक हैं। इसका मतलब लगभग 3–5% कर्मचारियों का कुल कार्यबल प्रभावित होगा।
  • बड़े टेक कंपनियों जैसे Google, Amazon, Microsoft, Meta H-1B वीज़ा के लिए ज्यादा आवेदन करती हैं, जबकि भारतीय IT कंपनियों की निर्भरता कम है।

इसका मतलब है कि भारतीय IT कंपनियां नई वीज़ा एप्लीकेशन्स कम करेंगी और अपनी सेवाओं को ऑफशोर और स्थानीय हायरिंग पर केंद्रित करेंगी।

कौन सी IT कंपनियां इससे प्रभावित नहीं होंगी?

कुछ IT कंपनियां पहले से ही H-1B वीज़ा पर कम निर्भर हैं और उनका संचालन मॉडल इस बदलाव से प्रभावित नहीं होगा।

  • Mphasis: कंपनी ने कहा कि नए वीज़ा शुल्क का वित्तीय प्रदर्शन पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं होगा। AI और स्थानीय हायरिंग पर ध्यान केंद्रित करने से कंपनी ने वीज़ा निर्भरता को कम किया है।
  • Cyient: FY26 में इस निर्णय का कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ेगा।
  • Coforge: अमेरिका से कुल राजस्व का लगभग 53% आता है, लेकिन कंपनी ने ह-1B वीज़ा निर्भरता पहले ही कम कर दी है।
  • Firstsource Solutions: कंपनी का संचालन पूरी तरह स्थानीय हायरिंग और वैश्विक डिलीवरी मॉडल पर आधारित है।
  • Sasken Technologies: कंपनी ने कहा कि यह आदेश अमेरिकी ग्राहकों के लिए उनकी सेवाओं पर असर नहीं डालेगा।

इन कंपनियों का मॉडल भविष्य में IT stocks को स्थिर बनाए रखने में मदद करेगा।

विशेषज्ञों की राय और निवेशकों के लिए सुझाव

JM Financial और SBI Securities के विश्लेषकों का कहना है कि:

  • IT stocks में प्रारंभिक गिरावट हो सकती है, लेकिन ऑफशोरिंग और स्थानीय हायरिंग से दीर्घकालिक प्रभाव कम होगा।
  • IT कंपनियों के ऑपरेटिंग मार्जिन पर अधिक असर नहीं पड़ेगा।
  • निवेशक गिरावट का फायदा उठाकर कुछ कंपनियों में निवेश कर सकते हैं, विशेषकर जो पहले से ही स्थिर और कम H-1B निर्भर हैं।

MOSL ने सुझाव दिया कि:

  • बड़े कैप IT stocks में HCL Technologies और Tech Mahindra में निवेश अच्छा हो सकता है।
  • मिड-कैप में Coforge और Hexaware को प्राथमिकता दी जा सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि IT sector valuations अभी भी उचित हैं, और नई टेक्नोलॉजी साइकिल और कमाई के अपडेट से रेटिंग में सुधार संभव है।

निवेशकों के लिए प्रमुख बातें

  1. गिरावट का फायदा उठाएँ – जिन IT stocks का संचालन मजबूत है और H-1B निर्भरता कम है, उनमें निवेश करना दीर्घकालिक दृष्टिकोण से लाभकारी हो सकता है।
  2. ऑफशोर मॉडल पर ध्यान दें – कंपनियां अब ऑन-साइट राजस्व की बजाय अधिक मुनाफेदार ऑफशोर डिलीवरी पर ध्यान केंद्रित करेंगी।
  3. कानूनी चुनौतियों का असर – H-1B वीज़ा शुल्क बढ़ोतरी पर US कोर्ट में कानूनी चुनौती आ सकती है, जो इस फैसले के प्रभाव को बदल सकती है।
  4. स्थिर कंपनियों पर भरोसा – Mphasis, Cyient, Coforge जैसी कंपनियों का मॉडल इस बदलाव से अप्रभावित रहेगा।

निष्कर्ष

IT stocks भारतीय निवेशकों के लिए हमेशा आकर्षक विकल्प रहे हैं, और हाल की गिरावट उन्हें निवेश का अवसर भी प्रदान कर सकती है। ट्रंप का H-1B वीज़ा बढ़ोतरी का निर्णय अल्पकालिक असर डाल सकता है, लेकिन भारतीय IT कंपनियों की स्थिर रणनीतियाँ, ऑफशोर डिलीवरी मॉडल और स्थानीय हायरिंग उन्हें लंबे समय तक मजबूत बनाए रखेगी।

इसलिए, यदि आप IT stocks में निवेश करने की योजना बना रहे हैं, तो विशेषज्ञों के सुझावों और कंपनियों की दीर्घकालिक रणनीतियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लेना सबसे सुरक्षित होगा।

Disclaimer: इस ब्लॉग में दी गई जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य के लिए है। निवेश निर्णय लेने से पहले कृपया प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें।

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